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अप्रैल 18, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज कि मुलाकात ख़ास हैं-Aaj ki mulakaat khas hain love story in hindi

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हेलो दोस्तों मैं हूं आपका दोस्त आर्यन , मैं एक राइटर हूं और मैं सच्ची घटना पे आधरित कहानियां लिखता हूँ , मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है और आज मैं सुनाने जा रहा हूँ , अपने दिल के सबसे  क़रीब अपने जान ( रानी ) कि प्रेम कहानी, इस कहानी के हर शब्द में ज़िक्र होगा , जिसे मैंने अपने दिल में बसा रखा हूँ। तो शुरू करते हैं इस क्यूट सी प्रेम कहानी को...... आज सालों बाद उनकी एक झलक पाने कि दिल में तमन्ना हैं उन्हें देखें अरसो होगा उनसे मिलने को दिल बेक़रार हैं , उन्हें एक झलक देख लू दिल को सुकून आ जाइए....... आज ओ घड़ी आ गया हैं, जिनसे मिलकर अपने दिल कि हर के बात उनको बताऊंगा। दिल मैं जितने राज़ हैं, हर के राज़ उन्हें बताऊंगा, न जाने वो इतने दिनों बाद जब हम उनसे मिलेंगे तो हमें गले से लगेंगे या फ़िर हमें गले लाकर रो देँगे ....... मैं ये सब सोच सोच कर मन ही मन खुश होते जा रहा हूँ, उनके बारे में सोच कर मेरे दिल जोरों से धड़क रहा हैं, उनसे मिलने कि खुशी इतनी हैं कि जैसे बारिश आने से किसान खुश होता हैं। आज शाम कि ट्रैन हैं औऱ सफ़र लम्बी हैं , उनसे मिलने कि तमन्ना दिल में बढ़ती ही जा रही हैं...जैसे जैसे ये सफ़र

Heart Touching Friendship Story in Hindi

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हैल्लो दोस्तों- मैं हूं आपका दोस्त आर्यन औऱ में लेकर आ गया हूं एक सच्चे दोस्त की कहानी जिसे पढ़ कर आपको अहसाह होगा कि दोस्त का होना लाइफ में कितना मैटर करता हैं। कहानी छोटी हैं लेक़िन आपके दिल को छू जिएगी, क्योंकि इस कहानी में गहराई बहुत है। True story in hindi  - READ यह कहानी हैं दो सच्चे दोस्त कि जिनमे दोस्ती बहुत गहरी होती हैं। एक दिन राहुल ऑफिस से अपने घर गया। वह उस दिन काफी ज्यादा व्यस्त था और वह काम की वजह से पूरी तरह से थक गया था। उसने घंटी बजाई और उसके दोस्त विवेक ने दरवाजा खोला। तभी राहुल वॉशरूम में फ्रेश होने चला गया और तब तक उसके दोस्त विवेक ने खाने को टेबल सेट करने लगा। ताकि दोनों दोस्तों आराम से साथ बैठ कर खा सके Mother loves  - READ उसका दोस्त विवेक बहुत अच्छा कुक हैं और उसने राहुल के लिए उसके मन पसंदीदा व्यंजन तैयार किया था। वे दोनों अपने दिन के बारे में बातें करते थे और शांति से रात का खाना खाते थे। और उसके बाद में, उन्होंने लैपटॉप पर अपनी पसंदीदा फिल्म देखने का फैसला किया। दोपहर 2 बजे के आसपास राहुल सो गए।  लेकिन विवेक बैड के कोने पर बैठा था और दीवार को घूर रहा था। वह अ