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सालों बाद उसकी कॉल आई मेरे पास-Saalo bad uski call aayi mere pass , very sad love story in hindi

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हेलो दोस्तों मैं हूं आपका दोस्त आर्यन , मैं एक राइटर हूं और मैं कहानियां सुनाता हूँ , मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है और आज मैं सुनाने जा रहा हूँ “सालों बाद उसकी कॉल आई मेरे पास .....” एक ऐसी लव स्टोरी जो आपकी मोहब्बत कि यादों को ताजा कर दी कि अगर आपने भी सच अगर सच्चा प्यार किया होगा तो किसी से तो ये लव स्टोरी  आपके दिल और दिमाग को रुला देगी , औऱ बोलेगी , ये मोहबत इतना कमबख्त क्यूँ होता हैं ... ये 2022 कि मेरी पहली लव स्टोरी हैं , आप सभी विवेर्स  को HAPPY NEW YEAR   🙏😍  आर्यन के तरफ़ से अगर ये लव स्टोरी पसंद आए तो अपना बहुमूल्य कमेंट देकर जरूर बताना , हमें मोटिवेशन मिलेगा , लिखिका के लिए .... तो चलिए शुरू करते हैं इस क्यूट सी सैड स्टोरी को 😔😣😓 सालों बाद उसकी कॉल आई मेरे पास .....” यही रात के करीब 1:30 बज रहे थे मैं जगा हुआ था। इंस्टाग्राम पर फीड्स स्क्रॉल कर रहा था memes देख रहा था अचानक एक अननोन नंबर से कॉल आई..... मुझे समझ में नहीं आया कि इतनी रात को आखिर कौन हो सकता है मैंने सोचा इग्नोर कर देता हूं अगर कोई इंपॉर्टेंट कॉल होगी तो दोबारा आ जाएगी। I ignore it , लेकिन वो ऑफ फिर आई मै

inspirational moral stories-प्रेरक नैतिक कहानियां

inspirational moral stories-प्रेरक नैतिक कहानियां


हेलो दोस्तों मैं हूं आपका दोस्त आर्यन , मैं एक राइटर हूं और मैं कहानियां लिखता हूँ , मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है और आज मैं सुनाने जा रहा हूँ , Top 10 Inspirational Moral Stories In Hindi आपने कितनी सारी Motivational स्टोरी सुनी होगी और पढ़ा होगा आपने लेकिन में जो Motivational स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ वो औरो से बेहद खास और दिलचस्प हैं 💔😔 ये Motivational स्टोरी आपका दिल जीत लेगी। तो शुरू करते हैं 10 Best motivational Moral Stroies...


मैं पिछले कुछ हफ़्तों में इनमें से बहुत सी लघु कथाएँ पढ़ा हूँ, जिनमें से मुझें 10 सबसे ज्यादा प्रेणादायक लगा मुझें  , जो आज में आप सभी को अपने पोस्ट के माध्यम से आपको बताने जा रहा हूँ , जो मैंने पढ़ा हैं।





Top 10 Inspirational moral stories -10 सबसे प्रेरणादायक लघुकथाओं


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पार्ट  1 - TARGET (लक्ष्य) 



एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा लिया। इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया। 


वह अभी अक्षर ज्ञान ही सिख पाया था, की इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई बंद कर दी और संगीत सिखने में लग गया। इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया।
 

महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।” युवक महात्मां की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।



शिक्षा:-


उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हमें भी शुरुआत से ही एक लक्ष्य बनाकर उसी के अनुरूप मेहनत करना चाहिए। इधर-उधर भटकने की बजाय एक ही जगह, एक ही लक्ष्य पर डटे रहने से ही सफलता व उन्नति प्राप्त की जा सकती हैं।



पार्ट -2 (वो सुनो जो ना कहा गया हो  Listen to what is not said )



बहुत समय पहले की बात है. चाइना के एक राजा ने अपने बेटे को अच्छा शासक बनाने के मकसद से एक जेन मास्टर के पास भेजा.


जेन मास्टर ने कुछ दिन अपने साथ रखने के बाद युवराज को एक साल के लिए जंगल में अकेले रहने के लिए भेज दिया.



जब युवराज लौटे तो मास्टर ने पूछा, “बताओ तुमने जंगल में क्या सुना?”


“मैंने कोयल की कूक सुनी, नदियों की कल-कल सुनी, पत्तियों की सरसराहट सुनी, मधुमक्खियों की गुंजन सुनी, मैंने झींगुरों का शोर सुना, हवा की धुन सुनी…” युवराज अपना अनुभव सुनाता चला गया.


जब युवराज ने अपीन बात पूरी कर ली तब मास्टर बोले, “अच्छा है, अब तुम एक बार फिर जंगल जाओ और जब तक तुम्हे कुछ नयी आवाजें ना सुनाई दे दें तब तक मत लौटना.”


एक साल जंगल में बिताने के बाद युवराज अपने राज्य को लौटना चाहता था, पर मास्टर की बात को टाल भी नहीं सकता था, इसलिए वह बेमन ही जंगल की ओर बढ़ चला.


कई दिन गुजर गए पर युवराज को कोई नयी आवाज़ नहीं सुनाई दी. वह परेशान हो उठा. उसने निश्चय किया कि अब वह हर आवाज़ को बड़े ध्यान से सुनेगा!



फिर एक सुबह उसे कुछ अनजानी सी आवाजें हल्की-हल्की सुनाई देने लगीं. इस घटना के कुछ दिनों बाद वह जेन मास्टर के पास वापस लौटा और बोला, “पहले ती मुझे वही ध्वनियाँ सुनाई दीं जो पहले देती थीं, लेकिन एक दिन जब मैंने बहुत ध्यान से सुनना शुरू किया तो मुझे वो सुनाई देने लगा जो पहले कभी नहीं सुनाई दिया था…. मुझे कलियों के खिलने की आवाज सुनाई देने लगी, मुझे धरती पर पड़ती सूर्य की किरणों, तितलियों के गीत, और घांस द्वारा सुबह की ओस पीने की ध्वनियाँ सुनाएं देने लगीं….”


यह सुनकर जेन मास्टर खुश हो गए और मुस्कुराकर बोले, “अनसुने को सुनने की क्षमता होना एक अच्छे राजा की निशानी है. क्योंकि जब कोई शासक अपने लोगों के दिल की बात सुनना सीख लेता है, बिना उनके बोले, उनकी भावनाओं को समझ लेता है, जो दर्द बयाँ न किया गया हो उसे समझ लेता है, अपने लोगों की अनकही शिकायतों को सुन लेता है, केवल वही अपनी प्रजा का विश्वास जीत सकता है, कुछ गलत होने पर उसे समझ सकता है और अपने नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरी कर सकता है. ”


दोस्तों, अगर हमें अपनी फील्ड का लीडर बनना है तो हमें भी वो सुनना सीखना चाहिए जो नहीं कहा गया है. यानी हमें उस युवराज की तरह बिलकुल अलर्ट हो कर अपना काम करना चाहिए और अपने साथ काम करने वालों की ज़रूरतों और भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए तभी हम खुद को एक ट्रू लीडर की तरह स्थापित कर सकेंगे.



एक व्यक्ति ने व्यापार में उन्नति की और लंदन में  ज़मीन ख़रीद उस पर आलीशान घर बनाया। भूमि पर पहले से ही एक खूबसूरत स्विमिंग पूल और पीछे  की और एक 100 साल पुराना लीची का पेड़ था। उन्होंने वो भूमि उस लीची के पेड़ के कारण ही ख़रीदी थी, क्यूँकि उनकी पत्नी को लीचियाँ बहुत पसंद थी। 


कुछ अरसे बाद Renovation के समय उनके कुछ मित्रों ने सलाह दी,उन्हें किसी वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। यद्यपि उसे ऐसी बातों पर विश्वास नहीं था, फिर भी मित्रों का मन रखने के लिए उन्होंने बात मान ली और Hongkong से 30 साल से वास्तु शास्त्र के बेहद प्रसिद्ध Master Cao  को बुलवा लिया। 


उन्हें Airport से लिया, दोनों ने शहर में खाना खाया और उसके बाद वो उन्हें अपनी कार में ले कर अपने घर की ओर चल दिए। रास्ते में जब भी कोई कार उन्हें Overtake करने की कोशिश करती, वो उसे रास्ता दे देते। Master Cao ने हंसते हुए कहा  आप बहुत Safe driving करते हैं। उसने भी हंसते हुए प्रत्युत्तर में कहा लोग अक्सर Overtake तभी करते हैं जब उन्हें कुछ आवश्यक कार्य हो, इसलिए हमें उन्हें रास्ता देना चाहिए। 


घर के पास पहुँचते-पहुँचते सड़क थोड़ी संकरी हो गयी और उसने कार थोड़ी और धीरे कर ली. तभी अचानक एक हंसता हुआ बच्चा गली से निकला और तेज़ी से भागते हुए उनकी कार के आगे से सड़क पार कर गया, वो उसी गति से चलते हुए उस गली की ओर देखते रहे, जैसे किसी का इंतज़ार कर रहे हों, तभी अचानक उसी गली से एक और बच्चा भागते हुए उनकी कार के आगे से निकल गया, शायद पहले बच्चे का पीछा करते हुए। 


Master Cao ने हैरान होते हुए पूछा - आपको कैसे पता कि कोई दूसरा बच्चा भी भागते हुए निकलेगा ?
उसने बड़े सहज भाव से कहा, बच्चे अक्सर एक-दूसरे के पीछे भाग रहे होते हैं और इस बात पर विश्वास करना संभव ही नहीं कि कोई बच्चा बिना किसी साथी के ऐसी चुहल और भाग दौड़ कर रहा हो, Master Cao इस बात पर बहुत ज़ोर से हंसे और बोले की आप निस्संदेह बहुत सुलझे हुए व्यक्ति हैं। 


घर के बाहर पहुँच कर दोनों कार से उतरे. तभी अचानक घर के पीछे की ओर से 7-8 पक्षी बहुत तेज़ी से उड़ते नज़र आए। यह देख कर उसने Master Cao से कहा कि यदि उन्हें बुरा न लगे तो क्या हम कुछ देर यहाँ रुक सकते हैं ?
Master Cao ने कारण जानना चाहा उसने कहा कि शायद कुछ बच्चे पेड़ से लीचियाँ चुरा रहे होंगे और हमारे अचानक पहुँचने से डर के मारे बच्चों में भगदड़ न मच जाए, इससे पेड़ से गिर कर किसी बच्चे को चोट भी लग सकती है। 


Master Cao कुछ देर चुप रहे, फिर संयत आवाज़ में बोले मित्र, इस घर को किसी वास्तु शास्त्र जाँच और उपायों की आवश्यकता नहीं है। 


उसने बड़ी हैरानी से पूछा ऐसा क्यूँ ?


Master Cao - जहां आप जैसे विवेकपूर्ण व आसपास के लोगों की भलाई सोचने वाले व्यक्ति उपस्थित/विद्यमान होंगे वो स्थान/संपत्ति वास्तु शास्त्र नियमों के अनुसार बहुत पवित्र-सुखदायी-फलदायी होगी। जब हमारा मन व मस्तिष्क दूसरों की ख़ुशी व शांति को प्राथमिकता देने लगे, तो इससे दूसरों को ही नहीं, स्वयं हमें भी मानसिक लाभ-शांति-प्रसन्नता मिलती है। 


जब कोई व्यक्ति सदा स्वयं से पहले दूसरों का भला सोचने लगे तो अनजाने में ही उसे संतत्व प्राप्त हो जाता है जिसके कारण दूसरों का भला हो रहा होता है व उसे ज्ञानबोध मिल जाता है। भले ही हम प्रण न करें परंतु क़ोशिश अवश्य करें कि हममें भी ऐसे कुछ गुण विकसित हो जाएं कि हमारे घर को Feng Shui अथवा वास्तु जैसे किसी जंत्र-मंत्र की आवश्यकता ही न रहे।


पार्ट -3 ( बदले_की_आग Story_on_Revenge )



बहुत समय पहले की बात है, किसी कुँए में मेढ़कों का राजा गंगदत्त अपने परिवार व कुटुम्बियों के साथ रहता था। वैसे तो गंगदत्त एक अच्छा शाषक था और सभी का ध्यान रखता था, पर उसमे एक कमी थी, वह किसी भी कीमत पर अपना विरोध सहन नहीं कर सकता था।


लेकिन एक बार गंगदत्त के एक निर्णय को लेकर कई मेंढकों ने उसका विरोध कर दिया। गंगदत्त को ये बात सहन नहीं हुई कि एक राजा होते हुए भी कोई उसका विरोध करने की हिम्मत जुटा सकता है। वह उन्हें सजा देने की सोचने लगा। लेकिन उसे भय था कि कहीं ऐसा करने पर जनता उसका विरोध ना कर दे और उसे अपने राज-पाठ से हाथ धोना पड़ जाए।


फिर एक दिन उसने कुछ सोचा और रात के अँधेरे में चुपचाप कुँए से बाहर निकल आया।


बिना समय गँवाए वह फ़ौरन  प्रियदर्शन नामक एक सर्प के बिल के पास पहुंचा और उसे पुकारने लगा।


एक मेढक को इस तरह पुकारता सुनकर प्रियदर्शन को बहुत आश्चर्य हुआ। वह बाहर निकला और बोला, “कौन हो तुम? क्या तुम्हे इस बात का भय नहीं कि मैं तुम्हे खा सकता हूँ?”



गंगदत्त बोला,” हे सर्पराज! मैं मेढ़कों का राजा गंगदत्त हूँ और मैं यहाँ आपसे मैत्री करने के लिए आया हूँ।”


“यह कैसे हो सकता है। क्या दो स्वाभाविक शत्रु आपस में मित्रता कर सकते हैं?”, प्रियदर्शन ने आश्चर्य से कहा।


गंगदत्त बोला, “आप ठीक कहते हैं, आप हमारे स्वाभाविक शत्रु हैं। लेकिन इस समय मैं अपने ही लोगों द्वारा अपमानित होकर आपकी शरण में आया हूँ, और शाश्त्रों में कहा भी तो गया है- सर्वनाश की स्थिति में अथवा अपने प्राणों की रक्षा हेतु शत्रु की अधीनता स्वीकार करने में ही समझदारी है… कृपया मुझे अपनी शरण में लें। मेरे दुश्मनों को मारकर मेरी मदद करें।”


प्रियदर्शन अब बूढ़ा हो चुका था, उसने मन ही मन सोचा कि यदि इस मेंढक की वजह से मेरा पेट भर पाए तो इसमें बुराई ही क्या है.


वह बोला, “बताओ, मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूँ?”


सर्प को मदद के लिए तैयार होता देख गंगदत्त प्रसन्न हो गया और बोला, “आपको मेरे साथ कुएं में चलना होगा, और वहां मैं जिस मेंढक को भी आपके पास लेकर आऊंगा उसे मारकर खाना होगा। और एक बार मेरे सारे दुश्मन ख़तम हो जाएं तो आप वापस अपने बिल में आकर रहने लगिएगा”


“पर कुएं में मैं रहूँगा कैसे मैं तो अपने बिल में ही आराम से रह सकता हूँ?”, प्रियदर्शन ने चिंता व्यक्त की।


उसकी चिंता आप छोड़ दीजिये आप हमारे मेहमान हैं, मैं आपके रहने का पूरा प्रबंध पहले ही कर आया हूँ. परन्तु वहां जाने से पहले आपको एक वचन देना होगा।


“वह क्या?” प्रियदर्शन बोला।



वह यह कि आपको मेरी, मेरे परिवार वालों और मेरे साथियों की रक्षा करनी होगी!”, गंगदत्त ने कहा।
प्रियदर्शन बोला- “निश्चितं रहो तुम मेरे मित्र बन चुके हो। अत: तुमको मुझसे किसी भी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। मैं तुम्हारे कहे अनुसार ही मेंढ़कों को मार-मार कर खाऊँगा।”


बदले की आग में जल रहा गंगदत्त प्रियदर्शन को लेकर कुएं में उतरने लगा।


पानी की सतह से कुछ ऊपर एक बिल था, प्रियदर्शन उस बिल में जा घुसा और गंगदत्त चुपचाप अपने स्थान पर चला गया।


अगले दिन गंगदत्त ने एक सभा बुलाई और कहा कि आप सबके लिए खुशखबरी है, बड़े प्रयत्न के बाद मैंने एक ऐसा गुप्त मार्ग ढूंढ निकाला है जिसके जरिये हम यहाँ से निकल कर एक बड़े तालाब में जा सकते हैं, और बाकी की ज़िन्दगी बड़े आराम से जी सकते हैं। पर ध्यान रहे मार्ग कठिन और अत्यधिक सकरा है, इसलिए मैं एक बार में बस एक ही मेंढक को उससे लेकर जा सकता हूँ।


अगले दिन गंगदत्त एक दुश्मन मेंढक को अपने साथ लेकर आगे बढ़ा और योजना अनुसार सांप के बिल में ले गया।


प्रियदर्शन तो तैयार था ही, उसने फ़ौरन उस मेंढक को अपना निवाला बना लिया।


अगले कई दिनों तक यह कार्यक्रम चलता रहा और वो दिन भी आ गया जब गंगदत्त का आखिरी दुश्मन प्रियदर्शन के मुख का निवाला बन गया।


गंगदत्त का बदला पूरा हो चुका था। उसने चैन की सांस ली और प्रियदर्शन को धन्यवाद देते हुए बोला, “सर्पराज, आपके सहयोग से आज मेरे सारे शत्रु ख़त्म हो गए हैं, मैं आपका यह उपकार जीवन भर याद रखूँगा, कृपया अब अपने घर वापस लौट जाएं।”


प्रियदर्शन ने कुटिलता भरी वाणी में कहा, “कौन-सा घर मित्र? प्राणी जिस घर में रहने लगता है, वही उसका घर होता है। अब मैं वहाँ कैसे जा सकता हूं? अब तक तो किसी और ने उस पर अपना अधिकार कर लिया होगा। मैं तो यही रहूंगा।”


“पर… आपने तो वचन दिया था।”, गंगदत्त गिड़गिड़ाया।


“वचन? कैसा वचन? अपने ही कुटुम्बियों की हत्या करवाने वाला नीच आज मुझसे मेरे वचन का हिसाब मांगता है! हा हा हा!” प्रियदर्शन ठहाका मारकर हंसने लगा।


और देखते ही देखते गंगदत्त को अपने जबड़े में जकड़ लिया।”


आज गंगदत्त को अपनी गलती का एहसास हो रहा था, बदले की आग में सिर्फ उसके दुश्मन ही नहीं जले… आज वो खुद भी जल रहा था।


मित्रों, क्षमा करने को हमेशा बदला लेने से श्रेयस्कर बताया गया है। बदले की चाह व्यक्ति के विचारों को दूषित कर देती है, उसके मन का चैन छीन लेती है। ये एक ऐसी आग होती है जो किसीऔर को जलाए या ना जलाए बदले की भावना


रखने वाले को ज़रूर भष्म कर देती है। अतः हमें इस दुर्भावना से दूर रहना चाहिए। हमें ये समझना चाहिए कि हर किसी को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है, यदि आपके साथ किसी ने बुरा किया है तो उसका फल उसे भगवान् को देने दीजिये खुद को बदले की आग में मत जलाइये!


पार्ट - 4 ( एक पिता ने अपने बेटे को दिया सरप्राइज ) 



एक आदमी और एक युवा किशोर लड़के ने एक होटल में इन किया और उन्हें उनके कमरे में दिखाया गया।  रिसेप्शनिस्ट ने मेहमानों के शांत तरीके और लड़के के फीके रंग को नोट किया।  बाद में लड़के और लड़के ने होटल के रेस्तरां में खाना खाया।

कर्मचारियों ने फिर देखा कि दोनों मेहमान बहुत शांत थे और लड़के को अपने भोजन में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

खाना खाने के बाद लड़का अपने कमरे में चला गया और वह आदमी रिसेप्शनिस्ट से मैनेजर को देखने के लिए कहने चला गया।  रिसेप्शनिस्ट ने शुरू में पूछा कि क्या सेवा या कमरे में कोई समस्या है, और चीजों को ठीक करने की पेशकश की, लेकिन उस व्यक्ति ने कहा कि इस तरह की कोई समस्या नहीं है।


वह अपने चौदह वर्षीय बेटे के साथ होटल में रात बिता रहा था, जो गंभीर रूप से बीमार था, शायद ऐसा ही था।  लड़के का जल्द ही इलाज होना था, जिससे उसके बाल झड़ जाएंगे।  वे एक साथ आराम करने के लिए होटल आए थे और इसलिए भी कि उस रात लड़के ने अपना सिर मुंडवाने की योजना बनाई थी, न कि यह महसूस करने के बजाय कि बीमारी उसे मार रही है।  पिता ने कहा कि वह अपने बेटे के समर्थन में अपना सिर भी मुंडवाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब वे दोनों अपने मुंडा सिर के साथ नाश्ता करने आए तो कर्मचारी भी उनका  सम्मान करे ।

प्रबंधक ने पिता को आश्वासन दिया कि वह सभी कर्मचारियों को सूचित करेंगे और वे उचित व्यवहार करेंगे।


अगली सुबह पिता और पुत्र नाश्ते के लिए रेस्तरां में दाखिल हुए।  वहाँ उन्होंने देखा कि चार पुरुष रेस्तरां कर्मचारी अपने कर्तव्यों में भाग ले रहे हैं, पूरी तरह से सामान्य रूप से, सभी मुंडा सिर के साथ।

Moral - कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस व्यवसाय में हैं, आप लोगों की मदद कर सकते हैं और आप फर्क कर सकते हैं।


पार्ट - 5 ( अंधी लड़की ) 


 
एक अंधी लड़की थी जो खुद से पूरी तरह से इस बात से नफरत करती थी कि वह अंधी थी।  एकमात्र व्यक्ति जिससे वह नफरत नहीं करती थी, वह उसका प्यार करने वाला प्रेमी था, क्योंकि वह हमेशा उसके लिए था।  उसने कहा कि अगर वह केवल दुनिया देख सकती है, तो वह उससे शादी करेगी।

एक दिन, किसी ने उसे एक जोड़ी आंखें दान कर दीं - अब वह अपने प्रेमी सहित सब कुछ देख सकती थी।  उसके प्रेमी ने उससे पूछा, "अब जब तुम दुनिया देख सकती हो, तो क्या तुम मुझसे शादी करोगी?"

जब उसने देखा कि उसका प्रेमी भी अंधा है, तो लड़की चौंक गई और उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया।  उसका प्रेमी आंसुओं में चला गया, और बाद में उसे यह कहते हुए एक पत्र लिखा:



 "बस मेरी आँखों का ख्याल रखना प्रिय।"



 कहानी की शिक्षा:



जब हमारी परिस्थितियाँ बदलती हैं, तो हमारा मन भी बदलता है।  हो सकता है कि कुछ लोग पहले की तरह न देख पाएं और शायद उनकी सराहना न कर पाएं।  इस कहानी से एक ही नहीं, बहुत सी बातें दूर करने हैं।


यह उन प्रेरणादायक लघु कथाओं में से एक है जिसने मुझे अवाक कर दिया।






 पार्ट -6 ( हाथी की रस्सी ) 




एक सज्जन हाथी के शिविर से गुजर रहे थे, और उन्होंने देखा कि हाथियों को पिंजरों में नहीं रखा जा रहा था या जंजीरों के उपयोग से नहीं रखा जा रहा था।


जो कुछ उन्हें शिविर से भागने से रोक रहा था, वह उनके एक पैर में बंधी रस्सी का एक छोटा सा टुकड़ा था।


जब वह आदमी हाथियों को देखता था, तो वह पूरी तरह से भ्रमित हो जाता था कि हाथियों ने अपनी ताकत का इस्तेमाल सिर्फ रस्सी को तोड़ने और शिविर से बचने के लिए क्यों नहीं किया।  वे आसानी से ऐसा कर सकते थे, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने ऐसा करने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की।


जिज्ञासु और उत्तर जानना चाहते हुए, उसने पास के एक प्रशिक्षक से पूछा कि हाथी बस वहाँ क्यों खड़े थे और उन्होंने कभी भागने की कोशिश नहीं की।

 प्रशिक्षक ने उत्तर दिया;


जब वे बहुत छोटे होते हैं और बहुत छोटे होते हैं तो हम उन्हें बांधने के लिए एक ही आकार की रस्सी का उपयोग करते हैं और उस उम्र में, उन्हें पकड़ने के लिए पर्याप्त है।  जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उन्हें विश्वास होता है कि वे अलग नहीं हो सकते।  उनका मानना ​​​​है कि रस्सी उन्हें अभी भी पकड़ सकती है, इसलिए वे कभी भी मुक्त होने की कोशिश नहीं करते हैं। ”



मैं हाथियों के मुक्त नहीं होने और शिविर से भागने का एकमात्र कारण यह था कि समय के साथ उन्होंने इस विश्वास को अपनाया कि यह संभव नहीं था।



Moral of this story - कहानी की शिक्षा:



दुनिया आपको कितना भी पीछे करने की कोशिश करे, हमेशा इस विश्वास के साथ बने रहें कि आप जो हासिल करना चाहते हैं वह संभव है।  यह विश्वास करना कि आप सफल हो सकते हैं, वास्तव में इसे प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है।


पार्ट - 7  ( मेंढकों का समूह (प्रोत्साहन)


 

जब मेंढकों का एक समूह जंगल से यात्रा कर रहा था, उनमें से दो एक गहरे गड्ढे में गिर गए।  जब अन्य मेंढकों ने गड्ढे के चारों ओर भीड़ लगाई और देखा कि यह कितना गहरा है, तो उन्होंने दो मेंढकों से कहा कि उनके लिए कोई उम्मीद नहीं बची है।



हालांकि, दो मेंढकों ने दूसरों की बातों को नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया और वे गड्ढे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।



उनके प्रयासों के बावजूद, गड्ढे के शीर्ष पर मेंढकों का समूह अभी भी कह रहा था कि उन्हें छोड़ देना चाहिए।  कि वे इसे कभी बाहर नहीं करेंगे।


आखिरकार, मेंढकों में से एक ने ध्यान दिया कि दूसरे क्या कह रहे थे और उसने हार मान ली, जिससे उसकी मौत हो गई।  दूसरा मेंढक जितना जोर से कूद सकता था कूदता रहा।  फिर से, मेंढकों की भीड़ ने उस पर चिल्लाया कि दर्द को रोको और बस मर जाओ।


वह और ज़ोर से कूदा और आखिकार कर दिखाया।  जब वह बाहर निकला, तो अन्य मेंढकों ने कहा, "क्या तुमने हमें नहीं सुना?"


मेंढक ने उन्हें समझाया कि वह बहरा है। वह सोचता है कि वे उसे पूरे समय तक आखिरकार, मेंढकों में से एक ने ध्यान दिया कि दूसरे क्या कह रहे थे और उसने हार मान ली, जिससे उसकी मौत हो गई।  दूसरा मेंढक जितना जोर से कूद सकता था कूदता रहा।  फिर से, मेंढकों की भीड़ ने उस पर चिल्लाया कि दर्द को रोको और बस मर जाओ।


वह और ज़ोर से कूदा और आखिकार कर दिखाया।  जब वह बाहर निकला, तो अन्य मेंढकों ने कहा, "क्या तुमने हमें नहीं सुना?"


मेंढक ने उन्हें समझाया कि वह बहरा है।  वह सोचता है कि वे उसे पूरे समय तक प्रोत्साहित कर रहे थे।



 कहानी की शिक्षा:



लोगों की बातों का दूसरे के जीवन पर बड़ा असर हो सकता है।  अपने मुंह से निकलने से पहले आप जो कहते हैं, उसके बारे में सोचें।  जीवन और मृत्यु के बीच बस यही अंतर हो सकता है।



पार्ट -8 ( चुम्बन से भरा बॉक्स ) 


 

कुछ समय पहले एक शख्स ने अपनी 3 साल की बेटी को सोने के रैपिंग पेपर का रोल बर्बाद करने की सजा दी थी।  पैसे की तंगी थी और वह क्रोधित हो गया जब बच्चे ने क्रिसमस ट्री के नीचे रखने के लिए एक बॉक्स को सजाने की कोशिश की।

फिर भी, अगली सुबह छोटी लड़की अपने पिता के लिए उपहार लाई और कहा, "यह तुम्हारे लिए है, पिताजी।"

वह आदमी पहले अपनी अति प्रतिक्रिया से शर्मिंदा हो गया, लेकिन उसका क्रोध तब जारी रहा जब उसने देखा कि डिब्बा खाली था।  वह उस पर चिल्लाया;  "क्या आप नहीं जानते, जब आप किसी को उपहार देते हैं, तो माना जाता है कि अंदर कुछ है?"


छोटी लड़की ने आंखों में आंसू लिए उसकी ओर देखा और रो पड़ी;


"ओह, डैडी, यह बिल्कुल भी खाली नहीं है।  मैंने बॉक्स में चुंबन उड़ा दिया।  वे सब तुम्हारे लिए हैं, डैडी।"



पिता को कुचल दिया गया था।  उसने अपनी छोटी लड़की के चारों ओर अपनी बाहें डाल दीं और उसने उससे क्षमा की भीख माँगी।


कुछ ही देर बाद एक हादसे ने बच्चे की जान ले ली।


उसके पिता ने कई वर्षों तक सोने का डिब्बा अपने बिस्तर के पास रखा और जब भी वह निराश होता, तो वह एक काल्पनिक चुंबन निकालता और उस बच्चे के प्यार को याद करता जिसने उसे वहाँ रखा था।


कहानी की शिक्षा:


प्यार दुनिया का सबसे अनमोल तोहफा है।


पार्ट - 9 एक पाउंड मक्खन (ईमानदारी)

 

एक किसान था जो एक बेकर को एक पाउंड मक्खन बेचता था।  एक दिन बेकर ने यह देखने के लिए मक्खन तौलने का फैसला किया कि क्या उसे सही मात्रा मिल रही है, जो उसे नहीं मिल रही थी।  इससे नाराज होकर वह किसान को कोर्ट ले गया।


न्यायाधीश ने किसान से पूछा कि क्या वह मक्खन को तौलने के लिए किसी उपाय का उपयोग कर रहा है।  किसान ने उत्तर दिया, “माननीय, मैं आदिम हूँ।  मेरे पास उचित माप नहीं है, लेकिन मेरे पास एक पैमाना है।"


न्यायाधीश ने पूछा, "तो फिर तुम मक्खन कैसे तौलते हो?"


किसान ने उत्तर दिया;



"महाराज, बहुत पहले से ही बेकर ने मुझसे मक्खन खरीदना शुरू किया था, मैं उससे एक पाउंड की रोटी खरीद रहा था।  हर दिन जब बेकर रोटी लाता है, तो मैं इसे पैमाने पर रखता हूं और मक्खन में उतना ही वजन देता हूं।  अगर किसी को दोष देना है, तो वह बेकर है। ”



 कहानी की शिक्षा:


 
जीवन में आपको वही मिलता है जो आप देते हैं।  कोशिश मत करो और दूसरों को धोखा दिया।





 पार्ट -10  ( हमारे रास्ते में बाधा )


 

प्राचीन काल में, एक राजा के पास सड़क पर एक शिलाखंड था।  फिर वह छिप गया और देखता रहा कि क्या कोई पत्थर को रास्ते से हटाएगा।  राजा के कुछ सबसे धनी व्यापारी और दरबारी आए और बस उसके चारों ओर चले गए।


बहुत से लोगों ने राजा पर सड़कों को साफ न रखने का आरोप लगाया, लेकिन उनमें से किसी ने भी पत्थर को रास्ते से हटाने के लिए कुछ नहीं किया।


तभी एक किसान सब्जियों का भार लेकर आया।  शिलाखंड के पास पहुंचने पर किसान ने अपना बोझ डाला और पत्थर को सड़क से बाहर धकेलने की कोशिश की।  काफी मशक्कत और मशक्कत के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली।


जब किसान अपनी सब्जियां लेने वापस गया, तो उसने देखा कि सड़क पर एक पर्स पड़ा है, जहां पत्थर पड़ा था।

 
पर्स में कई सोने के सिक्के और राजा का एक नोट था जिसमें बताया गया था कि सोना उस व्यक्ति के लिए था जिसने सड़क से बोल्डर को हटाया था।


 कहानी की शिक्षा:


 
जीवन में हमारे सामने आने वाली हर बाधा हमें अपनी परिस्थितियों को सुधारने का अवसर देती है, और जबकि आलसी शिकायत करते हैं, दूसरे अपने दयालु हृदय, उदारता और काम करने की इच्छा के माध्यम से अवसर पैदा कर रहे हैं।



 पार्ट - 11 ( तितली (संघर्ष)


 
एक आदमी को एक तितली का कोकून मिला।


एक दिन एक छोटा सा उद्घाटन दिखाई दिया।  वह बैठ गया और कई घंटों तक तितली को देखता रहा क्योंकि वह अपने शरीर को उस छोटे से छेद से निकालने के लिए संघर्ष कर रही थी।

 
जब तक उसने अचानक कोई प्रगति करना बंद नहीं कर दिया और ऐसा लग रहा था कि यह अटका हुआ है।


तो उस आदमी ने तितली की मदद करने का फैसला किया।  उसने कैंची की एक जोड़ी ली और कोकून के शेष हिस्से को काट दिया।  तितली तब आसानी से निकली, हालाँकि उसका शरीर सूजा हुआ था और छोटे, सिकुड़े हुए पंख थे।


उस आदमी ने इसके बारे में कुछ नहीं सोचा और तितली को सहारा देने के लिए पंखों के बढ़ने की प्रतीक्षा में वहीं बैठ गया।  लेकिन ऐसा नहीं हुआ.  तितली ने अपना शेष जीवन उड़ने में असमर्थ, छोटे पंखों और सूजे हुए शरीर के साथ रेंगते हुए बिताया।

 
आदमी के दयालु हृदय के बावजूद, वह यह नहीं समझ पाया कि सीमित कोकून और तितली को छोटे से उद्घाटन के माध्यम से खुद को पाने के लिए संघर्ष की आवश्यकता है;  यह तितली के शरीर से तरल पदार्थ को उसके पंखों में धकेलने का परमेश्वर का तरीका था।  एक बार कोकून से बाहर हो जाने के बाद खुद को उड़ान के लिए तैयार करने के लिए।




कहानी की शिक्षा:


जीवन में हमारे संघर्ष से हमारी ताकत का विकास होता है।  संघर्षों के बिना, हम कभी विकसित नहीं होते हैं और कभी मजबूत नहीं होते हैं, इसलिए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम स्वयं चुनौतियों का सामना करें, और दूसरों की मदद पर निर्भर न रहें।



 पार्ट - 12 ( अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें (क्रोध)




एक बार एक छोटा लड़का था जिसका मिजाज बहुत खराब था।  उसके पिता ने उसे कीलों का एक थैला सौंपने का फैसला किया और कहा कि हर बार लड़के ने अपना आपा खो दिया, उसे बाड़ में एक कील ठोकनी पड़ी।

 
पहले दिन लड़के ने उस बाड़ में 37 कील ठोक दी।


अगले कुछ हफ्तों में लड़के ने धीरे-धीरे अपने गुस्से को नियंत्रित करना शुरू कर दिया, और बाड़ में ठोके गए कीलों की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई।

 
उन्होंने पाया कि उन कीलों को बाड़ में ठोकने की तुलना में अपने गुस्से को नियंत्रित करना आसान था।


आखिरकार वो दिन आ ही गया जब लड़के ने अपना आपा बिल्कुल भी नहीं खोया।  उसने अपने पिता को खबर सुनाई और पिता ने सुझाव दिया कि लड़के को अब हर दिन एक कील निकालनी चाहिए, वह अपना गुस्सा नियंत्रण में रखता है।


दिन बीतते गए और लड़का आखिरकार अपने पिता को बता पाया कि सभी नाखून चले गए हैं।  पिता ने अपने पुत्र का हाथ पकड़ कर बाड़े में ले गया।




"तुमने अच्छा किया है, मेरे बेटे, लेकिन बाड़ में छेदों को देखो।  बाड़ कभी भी एक जैसी नहीं होगी।  जब आप गुस्से में कुछ कहते हैं, तो वे इस तरह एक निशान छोड़ जाते हैं।  आप एक आदमी में चाकू डाल सकते हैं और उसे बाहर निकाल सकते हैं।  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी बार कहते हैं कि मुझे खेद है, घाव अभी भी है। ”



कहानी की शिक्षा:



अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें, और इस समय लोगों से ऐसी बातें न कहें, जिससे आपको बाद में पछताना पड़े।  जीवन में कुछ चीजें, आप वापस नहीं ले सकते।


यदि आप किसी अन्य प्रेरणादायक लघु कथाओं के बारे में जानते हैं जो आपको लगता है कि सूची में शामिल होनी चाहिए, तो मुझे नीचे टिप्पणी में बताएं या मुझे एक ईमेल छोड़ दें और मैं उन्हें में बाद में भाग दो में प्रदर्शित करूंगा।

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Thanku ❤️❤️🙏🙏😍😍


Written By –✍ @Aryan-Rani❤️😘 



Dear Reader, My name is Aryan Yadav . I have been blogging for last 6 month and I have been giving Heart touching love story content as far as possible to the reader. Hope you like everyone, please share your classmate and with friends too.....❤️🙏🙏











 

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