यह कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी : Very Emotional Story In Hindi

यह कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी : Very Emotional Story In Hindi




यह कहानी आपको रोने पर मजबूर कर देगी : Very Emotional Story In Hindi



जीवन में किसी के चले जाने से या कुछ खो जाने से हम अक्सर उदास हो जाते हैं, यह मनुष्य का स्वभाव हैं, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह दुनिया की रीत हैं। जब जिस समय हमारे पास जो हैं, अनमोल हैं।


हैल्लो दोस्तों- मैं हूं आपका दोस्त आर्यन औऱ में लेकर आ गया हूं एक बहुत ही खूबसूरत और दिल को छू जाने वाली कहानी। कहानी छोटी हैं लेक़िन आपके दिल को छू जिएगी,क्योंकि इस कहानी में गहराई बहुत है। यह कहानी हैं आरुही और एक गुड़िया कि , जो एक छोटी लड़की ऊपर लिखी हुए हैं।



एक दिन कि बात हैं आरुही सुबह पार्क में टहलते हुए जा रही थी तभी उसे एक रोती हुई बच्ची मिली। आरुही ने उससे रोने का कारण पूछा, तो लड़की ने बताया कि वह जिस गुड़िया से खेल रही थीं, वह इसी पार्क में कही खो गईं हैं। आरुही ने उस बच्ची को उसकी गुड़िया ढूंढ लाने का आस्वाशन दिया जिससे वह बच्ची चुप हो गई।





आरुही ने गुड़िया ढूंढ़ने के लिए समय माँगी और फिर दूसरे दिन गुड़िया लाने का वादा करके वहाँ से चली गई, पर गुड़िया ना तो आरुही को मिली और ना ही उस बच्ची को।



आरुही ने गुड़िया की तरफ से एक काल्पनिक पत्र उस बच्ची को लिखी और जब वह बच्ची पार्क में गुड़िया पाने की आशा में आई तो आरुही ने वह पत्र उस बच्ची को पढ़ कर सुनाया। पत्र इस प्रकार था ' कृप्या रोना मत, मै समय समय पर उस गुड़िया के बारे में तुम्हें लिखती रहूँगी, बस तुम रोना मत।'



अब आरुही रोज़ उस खोई हुई गुड़िया की तरफ से काल्पनिक पत्र लिखने लगी और लगभग रोज़ ही उस बच्ची को पढ़ कर सुनाती जो कि यात्रा का काल्पनिक वर्णन हुआ करता था। आरुही ने इस काल्पनिक लेकिन रोचक वर्णन ने उस बच्ची को रोने नहीं दिया। वह खुशी-खुशी अपनी गुड़िया की घुमक्कड़ी के किस्से सुनाने लगी। अब वह ख़ुश रहने लगी।




एक दिन जब काफ़ी कहानिया हो गई तो आरुही ने एक दूसरे गुड़िया उस बच्ची को लाकर दी। जाहिर हैं, वह गुड़िया  बदली हुई थी। उस बच्ची को अपनी खोई हुई पुरानी गुड़िया जैसे नयी लगी, तो वह आरुही की और देखने लगी। 




आरुही  अनजान बनते हुए गुड़िया में चिपकी एक चिट को निकाल कर पढ़ने लगी। उसमे लिखा हुआ था 'यह मैं ही हूं, तुम्हारी वाली गुड़िया जो पार्क में खो गई थीं। दुनिया भर की लंबी यात्रा की वजह से मै थोड़ी बदल गई हूं।' बच्ची को इस गुड़िया और अरूही पर विश्वास हो गया वह गुड़िया लेकर घर चली गई।




वर्षो बाद जब वह बच्ची बड़ी हो गई, तो एक दिन वह अपनी अलमारी में कुछ ढूंढ रही थीं तो उसका ध्यान उसी गुड़िया पर गया, जो आरुही ने उसे दी थीं। बचपन की बातें याद करके वह हँसने लगी। उसे सब समझ आ चुका था कि आरुही ने कैसे उसका मन रखा।उसे उस गुड़िया पर फ़िर प्यार आने लगा। वह उसे बड़े गौर से देखने लगी।





तभी उसकी नज़र गुड़िया कि फ्रॉक की आस्तीन में छुपे एक  छोटे से पत्र पे गईं। उसने बड़ी व्येकुलता से वह पत्र निकाला और पढ़ने लगी। पत्र में साँझेप में यह लिखा हुआ था 'हर वह चीज़ जिससे तुम प्यार करती हो,  कभी न कभी  तुमसे खो जिएगी और जो तुम्हारे पास होगी ,वही तुम्हारे लिए सच्चे रूप में बनी होंगी। रूप भले ही भींनन होगा, पर प्यार एकदम खालिस होगा।'

24 टिप्पणियाँ

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  1. U r right sir ..kisi chiz ka importance uske jane ke bad hi Pata chalta hn Ekman sahi kaha apne sir

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  2. Sir Jo yah aapki website hai hindisstory.in kya kahaniyan yahan se lekar YouTube per dal sakte hain koi copyright bhi aaega sir please sir reply
    satyam441155@gmail.com

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